Jagannath Rath Yatra 2024: जगन्नाथ रथ यात्रा का इतिहास और धार्मिक महत्व, जाने क्यों मनाते हैं यह दिव्य पर्व

Jagannath Rath Yatra 2024: जगन्नाथ रथ यात्रा का इतिहास और धार्मिक महत्व, जाने क्यों मनाते हैं यह दिव्य पर्व

Jagannath Rath Yatra 2024: आज देश-दुनिया मे भगवान जगन्नाथ रथ यात्रा का शुभ पर्व मनाया जा रहा है, जगन्नाथ रथ यात्रा उड़ीसा राज्य के पुरी नगर में मनाया जाने वाला एक प्रमुख हिंदू पर्व है। यह त्योहार हर वर्ष आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाया जाता है और इसमें भगवान जगन्नाथ, उनके भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ अपने मौसी घर गुंडीचा मंदिर रथ में जाते है। इस रथ यात्रा के दौरान लाखों श्रद्धालु रथ को खींचते है।

जगन्नाथ रथ यात्रा का इतिहास

पुरी की जगन्नाथ रथ यात्रा कई शताब्दियों से मनाया जा रहा है और इसका इतिहास बहुत प्राचीन है। रथ यात्रा का वर्णन पद्म पुराण, स्कंद पुराण, कपिला समहिता और ब्रह्म पुराण में भी मिलता है। मूल रूप से धार्मिक कथा के अनुसार देवी सुभद्रा ने अपने मौसी के घर पर जाने की इच्छा प्रकट की थी उसे ही पूरा करने के लिए भगवान जगन्नाथ अपने बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ नौ दिनों के लिए गुंडिचा मंदिर की यात्रा पर निकलते हैं। इसके अलावा,पश्चिमी स्कॉलर्स स्टाजा ने उल्लेख किया है कि 1150 ई. में भव्य मंदिर के निर्माण के बाद, गंग राजवंश ने रथ यात्रा की शुरुआत की और 1321 में, ओडोरिक ने अपने दस्तावेज में उल्लेख किया कि जनता ने रथों पर “मूर्तियाँ” रखी, और राजा और उनके लोग उन्हें धुनों और गीतों के साथ खींच रहे थे।

रथ यात्रा की तैयारियाँ और आयोजन

रथों के निर्माण की शुरुवात अक्षय  तृतीया से हो जाती है। लकड़ी के विशाल रथों का निर्माण पुरी के विशेष कारपेंटर समुदाय द्वारा किया जाता है, जो पीढ़ियों से इस कार्य को करते आ रहे है और इन्हें ही रथों को बनाने का विशेष अधिकार है। रथ के निर्माण के लिए विशेष रूप से फसी, भौंरा और असना पेड़ो की लकड़ी द्वारा ही किया जाता है। तीनों रथ को बेहद आकर्षक और भव्य रूप से सजाया जाता है जो  शिल्पकला का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत करते है।

यात्रा के दिन, भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की मूर्तियों को मुख्य मंदिर से निकालकर रथों में विराजमान किया जाता है। उसके बाद चेरापहरा किया जाता है। यह एक अनोखी परंपरा है जिसमें पुरी के राजा स्वर्ण झाड़ू से रथों की सफाई करते हैं। इसके बाद, लाखों भक्तों की उपस्थिति में ये रथ मंदिर से लगभग 3 किलोमीटर दूर उनके मौसी के घर गुंडिचा मंदिर की ओर खींचे जाते हैं। इस यात्रा में शामिल होना और रथों को खींचना भक्तों के लिए अत्यंत पुण्य का कार्य माना जाता है।

यात्रा का धार्मिक महत्व

जगन्नाथ रथ यात्रा का धार्मिक महत्व केवल पुरी तक सीमित नहीं है। इसे भारत और विदेशों में भी बड़ी श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाता है। जिस तरह पुरी के राजा स्वर्ण झाड़ू से रथों की सफाई करते है। इस परंपरा के द्वारा यह विशेष रूप से  समाज को गहरा संदेश देती है की भगवान जगन्नाथ अपने सभी भक्तों की भक्ति और श्रद्धा मे कोई भेदभाव नही करते  है, चाहे वे किसी भी पृष्ठभूमि से आते हो। रथ यात्रा में सभी वर्गों और जातियों के लोगों को एकजुट करना ही इसका प्रमुख लक्ष्य है। यह पर्व धार्मिक समानता और सामाजिक एकता का प्रतीक है, जिसमें सभी लोग बिना किसी भेदभाव के भाग लेते हैं और भगवान के प्रति अपनी श्रद्धा और भक्ति प्रकट करते हैं इस कार्य में शामिल होने वाले भक्तों को भगवान जगन्नाथ का आशीर्वाद प्राप्त होता है और उन्हें अपने पापों से मुक्ति मिलती है। यह कार्य भक्तों के लिए अत्यंत सम्मान और धार्मिक महत्व रखता है।

तीन अलग विशाल रथों का निर्माण

हर वर्ष तीन नए रथ बनाए जाते हैं। रूपकार सेवक द्वारा प्रत्येक रथों पर पुष्पों, पशु, पक्षियों और नौ प्रकार के देवताओं को  लकड़ियों पर चित्रित किया जाता है। खास बात ये है कि तीनों रथों को बनाने में किसी भी धातु का प्रयोग नहीं होता है।

तीनों रथों के नाम और उनकी विशिष्टताएं इस प्रकार हैं:

नंदिघोष: भगवान जगन्नाथ का रथ है, जिसमें 16 पहिये होते है और इसे गरुड़ का प्रतीक माना गया है।
इस रथ की ऊंचाई 44.2 फीट है। जिसमें 832 लकड़ियों और लाल,पीले वस्त्रों का प्रयोग हुआ है।

तालध्वज: बलभद्र का रथ है, जिसमें 14 पहिये होते हैं और इसे तालध्वज (ध्वज) का प्रतीक माना जाता है। इस रथ की ऊंचाई 43.3 फीट है। जिसमें 763 लकड़ियों और लाल,हरे वस्त्रों का प्रयोग हुआ है।

दर्पदलन या पद्म रथ: देवी सुभद्रा का रथ है, जिसमें 12 पहिये होते हैं और इसे पद्म (कमल) का प्रतीक माना जाता है। इस रथ की ऊंचाई 42.3 फीट है। जिसमें 593 लकड़ियों और लाल,काले वस्त्रों का प्रयोग हुआ है।

उड़ीसा की संस्कृति का उच्चतम प्रतिनिधित्व करता श्री जगन्नाथ रथ यात्रा

जगन्नाथ रथ यात्रा का सांस्कृतिक प्रभाव भी अत्यंत व्यापक है। यह पर्व उड़ीसा की संस्कृति और परंपराओं का प्रतिनिधित्व करता है। रथ यात्रा के दौरान विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है, जिनमें लोक नृत्य, संगीत और नाटकों का प्रदर्शन होता है।
रथ यात्रा के इस शुभ अवसर पर देश विदेश से लाखो भक्त पुरी नगर  आते है जिस कारण वह उड़ीसा की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर और परंपराओं से रूबरू हो पाते हैं।

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